नेलांग घाटी वर्णन | Nelong Valley Distance and Travel Guide from Dehradun in Hindi|
नेलांग घाटी का इतिहास | History Of Nelong Valley in Hindi |
वर्ष 2017 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने पर्यटन अधिकारी तथा गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों के साथ मार्ग का निरीक्षण करके शासन से वित्तीय मदद मांगी और आखिरकार सरकारी तंत्र ने इसके इजाजत दे भी दी।
****Update August 2021
![]() |
| गर्तांग गली, अगस्त 2021 |
![]() |
| गर्तांग गली, अगस्त 2021 |
नेलांग घाटी में प्रवेश की आवश्यक शर्तें | Things to keep in mind while Visiting Nelong Valley |
***नियमों में समय के अनुसार बदलाव हो सकते हैं, कृपया आप आधिकारिक जानकारी लेकर ही प्रवेश करें।***
नेलांग वैली पहुंचने के लिए परमिट | Nelong Valley Online Permit |
- आसान- 3500 मीटर से नीचे
- मध्यम- 3500 मीटर – 4000 मीटर
- कठिन- 4000 मीटर से ऊपर
कैसे पहुँचें नेलांग वैली? How To Reach Nelong Valley from Dehradun?
सड़क मार्ग द्वारा नेलांग वैली? How To Reach Nelong Valley from Dehradun by Road?
नेलांग घाटी पहुँचने के लिए सबसे पहले उत्तरकाशी स्थान पहुंचना होता है। राज्य की राजधानी देहरादून से स्थान उत्तरकाशी की न्यूनतम दूरी लगभग 145 किलोमीटर है जिसको तय करने में लगभग 5-6 घंटे का समय लगता है। देहरादून से मसूरी, चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी होते हुए भैरोंघाटी तक लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। उत्तरकाशी से नेलांग गाँव की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है जिसे तय करने में 4 -5 घंटे का समय लग जाता है।
हवाई मार्ग द्वारा नेलांग वैली? How To Reach Nelong Valley by air?
रेल मार्ग द्वारा नेलांग वैली? How To Reach Nelong Valley by Train?
नेलांग घाटी का मौसम और तापमान | Nelong Valley Weather And Temperature |
गर्मियों में नेलांग घाटी का तापमान(अप्रैल से जून तक) | Nelong Valley Temperature In Summer |
मानसून में नेलांग घाटी का तापमान(जुलाई से सितंबर तक) | Nelong Valley Temperature In Monsoon |
न्यूनतम: लगभग 8-10 ℃
सर्दियों में नेलांग घाटी का तापमान(अक्टूबर से फरवरी तक) | Nelong Valley Temperature In Winter |
न्यूनतम: लगभग 0℃ और कम
नेलांग जाने का सबसे अच्छा समय | Best Time To Reach Nelong Valley from Dehradun |
नेलांग घाटी में घूमने के लिए प्रमुख स्थान | Places To Visit Near Nelong Valley |
उत्तरकाशी से 90 किलोमीटर दूर स्थित भैरोघाटी से ही नेलांग घाटी का रास्ता है। भैरों घाटी से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर नेलांग गाँव पड़ता है। नेलांग गाँव में आइटीबीपी और भारतीय सेना का कैंप है। नेलांग गाँव से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर नागा जगह है। नागा से लगभग 15 किलोमीटर दूर जादूंग गाँव तथा नीलापानी है। जबकि नागा से एक मार्ग सोनम, त्रिपानी, पीडीए, सुमला व मेंड़ी को भी जाता है।
17वीं शताब्दी में पेशावर के पठानों ने समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर नेलांग घाटी में हिमालय की खड़ी पहाड़ी को काटकर यह खतरनाक रास्ता तैयार किया था। लगभग 500 मीटर लंबा लकड़ी से तैयार यह सीढ़ीनुमा मार्ग (गर्तांगली) भारत-तिब्बत व्यापार का प्रमाण रहा है। सन् 1962 से पूर्व भारत-तिब्बत के व्यापारी याक, घोड़ा-खच्चर व भेड़-बकरियों पर सामान लादकर इसी रास्ते से आवागमन करते थे। भारत-चीन युद्ध के बाद दस वर्षों तक सेना ने भी इस मार्ग का उपयोग किया।
![]() |
| गर्तांगली 2021 नवनिर्माण से पहले |
![]() |
| गर्तांग गली, अगस्त 2021 |
मेमोरियल पॉइंट के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। दरअसल इन स्थानों पर सैनिकों का ड्यूटी करना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। यहाँ सर्दियों में भारी बर्फ़बारी के चलते सैनिकों को पीने के पानी की व्यवस्था करने में तक काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सैनिक बर्फ को पिघला कर पानी का इंतजाम करते हैं।
लगभग 2 दशक पुरानी यह घटना भारत-चीन एफडी रेजिमेंट के तीन सैनिकों की है। 6 अप्रैल 1994 को 64 एफडी रेजीमेंट के सैनिक हवलदार झूम प्रसाद गुरंग, नायक सुरेंद्र और दिन बहादुर गश्त कर रहे थे। जो पीने के पानी की तलाश में भटकते हुए ग्लेशियर के नीचे दबकर शहीद हो गए थे। आज भी सीमा पर आगे बढ़ने से पहले शहीद सैनिकों के स्मारक मेमोरियल पॉइंट पर पानी से भरी बोतलें रखी जाती हैं। इस जगह पर गश्त लगाने वाले कई जवानों का कहना है कि शहीद सैनिक आज भी उनके सपनों में आ कर पानी मांगते हैं।
भले ही कई लोग इस बात को अंधविश्वास माने लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि किस तरह सेना के जवान विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी ड्यूटी निभाते हैं।
3: भैरव मंदिर, भैरों घाटी
4: हर्षिल
हर्षिल, भैरों घाटी से पहले पड़ने वाला एक प्रमुख पर्यटक स्थान है। यहाँ भारतीय सेना का बेस कैंप भी है। हर्षिल घाटी सेब के बगीचों के लिए काफी प्रसिद्ध है।
![]() |
| फोटो का स्रोत : Ashish Dobhal |
5: गंगोत्री मंदिर
6: गौमुख ट्रेक
![]() |
| गंगा नदी का उद्गम स्थान गौमुख |
7: मुखवा गाँव
हर्षिल से लगभग 4 किलोमीटर बाद तथा भैरों घाटी से पहले पड़ने वाला मुखवा गाँव, माँ गंगा का मायका है। शीतकालीन सत्र में माँ गंगा की डोली गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद रहने पर मुखवा गाँव के मंदिर में ही रखी जाती है।
8: जादूँग गाँव और जनक ताल



















गर्तनग गली लकड़ी के ब्रिज तक कैसे जा सकते हैं?
3km treck
tell us about the stay